आओ, आज नारा हम बदलते हैं
देश के लिए मरने का ही नहीं,
दुश्मन को मार, जीने का प्रण लेते हैं
रक्त अपना अमूल्य है,
बहाने नहीं, बचाने का संकल्प लेते है,
और, दुश्मन के रक्त को बहाने का प्रण लेते है
जैसा दुश्मन, वैसी दुश्मनी निभानी है
युद्ध के मैदान में ही नहीं,
उसके चहुँ ओर घात लगानी है
आओ, आज नारा हम बदलते हैं
देश के लिए मरने का ही नहीं,
दुश्मन को मार, जीने का प्रण लेते हैं
इन वीरों के खून का,
क़र्ज़ हमे चुकाना है
घुटनों पर दुश्मन को हमे लाना है
माँ-बाप की लाठी, बहन का गुरुर,
भाई का संगी, पत्नी का सिन्दूर,
बच्चे के सिर का छत्र हमे बचाना है
आओ, आज नारा हम बदलते हैं
देश के लिए मरने का ही नहीं,
दुश्मन को मार, जीने का प्रण लेते हैं
हर शहीद के क़र्ज़ को चुकाना है
उसके खून के हर कतरे को
माथे का तिलक हमे बनाना है
अब, खौलते हुए अपने खून को,
खौलते हुए रखना है
रक्त की हर बूँद का हिसाब हमें लेना है
आओ, आज नारा हम बदलते हैं
देश के लिए मरने का ही नहीं,
दुश्मन को मार, जीने का प्रण लेते हैं
------ विभा शर्मा (जून १९, २०२०)