सब के सब भारतीय,
आज कुछ सवाल, खुद से पूछीए
क्या लोकतंत्र में, सब जायज़ है?
क्या कोई मायने नहीं है,
लोकतंत्र के इन चिन्हों का,
अपने ही संविधान के पन्नों का?
अपनी बनायीं संस्थओं का?
अपनी चुनी सरकारों का?
अपने ही चमन का?
क्या किसी का कोई उत्तरदाईत्व नहीं ?
क्या हम इतने स्वछंद है?
क्या कोई भी मर्यादा नहीं?
बहुत मुश्किल से मिली आज़ादी है,
क्या चमन को तोड़,
तिनका -तिनका कर उड़ाने के लिए?
कहीं तो लकीर खींचनी होगी
कहीं तो रोक लगानी होगी
कहीं तो बैठ सोचना होगा
आज चमन आहत हुआ है,
आज चमन शर्मसार हुआ है,
आज चमन की आत्मा रोई है।
हम कर क्या रहे हैं?
किस दिशा में जा रहे हैं,
क्यूँ जा रहे हैं?
कहीं न कहीं हमे रुकना होगा,
आज ही बैठ सोचना होगा,
आज ही संभल जाना होगा।
कल, देर न हो जाए,
आज कुछ सवाल, खुद से पूछीए,
क्या लोकतंत्र के नाम पर, सब जायज़ है?
---- विभा शर्मा (जनवरी २६, २०२१)
👏🏼👏🏼👏🏼 Indeed very relevant today also … 😔
LikeLiked by 1 person
Thanks
LikeLike
👏🏼👏🏼👏🏼 Indeed very relevant even today… 😔
LikeLike
Thanks
LikeLike