आज का लोकतंत्र

सुना था,

चमन में लोकतंत्र है।
पर यह कैसा लोकतंत्र है?

जहाँ

कभी मतदाता बिकाऊ है,
तो कभी विधायक।

सुना था,
लोकतंत्र में मतदाता सर्वोपरि है।

यहाँ तो,
दल सर्वोपरि हैं,
और मतदाता स्तब्ध है, भौच्चक है।

सुना था,
लोकतंत्र में लोगो का राज है।

पर यहाँ तो,
लगता है दलों का और बलों का राज है।

सुना था,
लोकतंत्र में सब स्वतन्त्र हैं।

पर यहाँ तो,
मतदाता का मत …..
विधायक ही बंधक है, विधायक ही बंदी।

यह किस राह पर ले आये,
हम लोकतंत्र को?

आज,
मतदाता का मत धाराशाही है।

इसके लिए,
दलों का बल उत्तरदायी है।

फिर भी कहूँगी,
लोकतंत्र सर्वोपरि है।
शायद यह प्रचंड मतदाता की परीक्षा है।

आज,
मतदाता मूक दर्शक तो है, पर शायद प्रण लिए है।
लोकतंत्र को फिर सर्वोपरि बनाना है।

.....विभा शर्मा
.....May 18, 2020

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