कौन है यह शिक्षक?
क्यों दें उसे अधिकार उसके?
वो करता ही क्या है?
शिक्षक!
शिक्षा का रक्षक, है यह शिक्षक,
विद्यार्थी का रक्षक है, यह शिक्षक,
संस्कारों का रक्षक है, यह शिक्षक,
पथ का रक्षक है, यह शिक्षक।
चार दीवारों की कक्षा में पढ़ाते-पढ़ाते,
एक ही दिन में कंप्यूटर के डिब्बों से,
वर्चुअल वर्ल्ड में आ जाता है यह शिक्षक,
ऑफलाइन से ऑनलाइन हो जाता है, यह शिक्षक,
टेक्नोलॉजी को अपना,
तारों से खेलना सीख जाता है यह शिक्षक,
सीख-सीख, जोड़-तोड़ के,
कॉन्टेंट क्रिएटर भी बन जाता है यह शिक्षक।
प्रशासन के भी काम करता है, यह शिक्षक!
जनगणना भी करता है, यह शिक्षक!
चुनाव भी करवाता है, यह शिक्षक,
कोविद में भी ड्यूटी देता है, यह शिक्षक।
फिर भी यह शिक्षक, तो कुछ करता ही नहीं!
सोचो कहाँ हुई है, गलती तुमसे?
क्यों माँगना पड़ रहा है, अधिकार उसे अपना?
क्यों कक्षाओं से बाहर, सड़क-सड़क नारे लगा,
आमरण अनशन कर, ढूंढ रहा मान वो अपना।
शिक्षक को अधिकार दे,
शिक्षा का मान बढ़ने दो,
शिक्षक का मान बढ़ने दो,
राष्ट्र का निर्माण होने दो।
शिक्षक राष्ट्र का निर्माता है,
उसे उसका मान दे,
चार दीवारों की अपनी कक्षा में बैठ,
बच्चों के संग राष्ट्र निर्माण करने दो।
.... विभा शर्मा, दिसंबर ८, २०२१