ख़ामोशी
शोर भरी इस जिंदगी के,
उतार-चड़ाव में,
काश हम ख़ामोशी को समझ पाते।
खामोश चेहरों के पीछे की हंसी को,
हँसते चेहरों में छुपी ख़ामोशी को,
काश हम समझ पाते।
खामोश चेहरों के झांकते कटाक्ष को,
आखों के व्यंग को,
ख्यालों की उच्छलता को,
काश हम समझ पाते।
हँसते चेहरों के पीछे की ख़ामोशी की,
गहराई हम नाप पाते,
आखों में उभरे सवालों के,
उत्तर हम दे पाते।
शोर भरी इस जिंदगी के,
उतार-चड़ाव में,
काश हम ख़ामोशी को समझ पाते।
...... विभा शर्मा ०५/११/२०१८
ख़ामोशी की जुबान
ख़ामोशी की भी जुबान होती है,
ख़ामोशी भी सन्देश देती है।
सिर्फ सुनने की कोशिश कीजिये।
ख़ामोशी की भी आवाज़ ऊँची होती है,
ख़ामोशी भी चीखती है।
सिर्फ सुनने की कोशिश कीजिये।
ख़ामोशी तूफानों के पहले की हो,
यां ख़ामोशी तूफानों के बाद की हो।
ख़ामोशी की भी जुबान होती है.
सिर्फ सुनने की कोशिश कीजिये।
ख़ामोशी से बड़े-बड़े परेशां होते हैं,
ख़ामोशी बड़े-बड़ों को जलाती है।
ख़ामोशी की भी जुबान होती है.
सिर्फ सुनने की कोशिश कीजिये।
.......विभा शर्मा २०१८
खामोश लम्हे
जिंदगी के रास्तों में,
कुछ खामोश लम्हों की तलाश है।
अपने साथ ख़ामोशी से,
बिताने के लिए,
कुछ लम्हों की तलाश है।
शोर भरी इस जिंदगी में,
ख़ामोशी की तलाश हैं।
पर एक लम्हा भी ऐसा न मिला,
कोई लम्हा खामोश न था,
तो कोई लम्हा साथ न था।
जिंदगी के रास्तों में,
कुछ खामोश लम्हों की तलाश है।
अपने साथ बिताने के लिए,
कुछ खामोश लम्हों की तलाश है।
जिंदगी की भाग-दौड़ में,
रास्तों के उत्तर-चड़ाव में,
ख़ामोशी से साथ चलें,
कुछ ऐसे लम्हों की तलाश है।
.....विभा शर्मा ०२/१०/२०१८