हमारी मित्र सुचि का असमय ही, आकस्मात ही पांच तत्वों का यह शरीर पांच तत्वों में शामिल हुआ और, सृष्टि में विलीन हुआ आँखों के आगे आता है मित्र हमारे का फूलों की तरह, खिला हुआ चेहरा और मुस्कराहटों से सराबोर वक्तित्व शायद तेरी मुस्कराहटों, तेरी हंसी की खनखनाहट में हम देख ही न पाए दास्तां तेरे दर्द की वो दर्द, जो तुझे, तेरे अपनों को रुला गया आज हमारे अस्तित्व को भी हिला गया चलता- फिरता, हँसता-खेलता इंसान एक याद बन के रह गया जिसका सम्बोधन 'है' में था आज वो 'था' में हो गया मित्र तू आज शरीर के अस्तित्व को छोड़ यादों की बस्ती में बस गया हाँ, यादें ही तो रह गयी है अब हमारे पास आती रहेगी याद मित्र तेरी मित्रों की इस महफिल में तेरी हंसी की खनखनाहट के साथ हमारी मित्र सुचि का असमय ही, आकस्मात ही पांच तत्वों का यह शरीर पांच तत्वों में शामिल हुआ और, सृष्टि में विलीन हुआ विभा शर्मा