तक्क्षिला और नालन्दा की धरती इस धरती पर

तक्क्षिला और नालन्दा की इस धरती पर,
जहाँ शिक्षा का दर्जा ऊँचा था,
जहाँ शिक्षक का मान ऊँचा था।

राजनैतिक तंत्र वहाँ क्या कर गया?
शिक्षा को रोल गया,
शिक्षक को रोंध गया।

संस्कारों को छोड़ गया,
शिक्षाओं को भूल गया,
इतिहास को रोंध गया।

तक्क्षिला और नालन्दा की इस धरती पर,
फिर से उस स्वर्णिम युग को लाना है,
शिक्षा से, राजनीति को हटाना है।

फिर शिक्षा का मान बढ़ाना है,
फिर शिक्षक का मान बढ़ाना है,
तक्क्षिला और नालन्दा की इस धरती पर।

      ---- विभा शर्मा दिसंबर ७, २०२१

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