एक तरफ –
आज फिर चुनावों का मौसम है,
आज फिर चुनावों का मेला है,
आज फिर कुछ अंकों का खेला है,
आज फिर जोड़-तोड़ का झमेला है।
दूसरी तरफ –
दरियाँ और धरने है,
सड़कों पर शिक्षकों का रेला है,
हर तरफ हर तरह के नारें हैं,
हाय-हाय की आवाज़ के साथ।
और तीसरी तरफ?
जोड़-तोड़ का झमेले में फंसा,
राजनेता प्रशासन भूल,
रैली पर रैली कर रहा है,
राजनैतिक नेतागिरी कर रहा है।
शिक्षकों को उनका अधिकार न दे,
उनको उनका हक़ न दे,
बहुत कुछ मुफ्त में बाँट रहा है,
और शायद वोट खरीद रहा है।
हर तरफ –
आज फिर चुनावों का मौसम है,
आज फिर चुनावों का मेला है,
आज फिर कुछ अंकों का खेला है,
आज फिर जोड़-तोड़ का झमेला है।
….. विभा शर्मा, जनवरी ४, २०२२
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