
……. अनुभव तुकनायत, विभा शर्मा और अश्वनी तुकनायत
आओ लोहड़ी मनाएँ
शीत ऋतु की सर्द रात में,
लोहरी की अग्नि की चमकती गर्माहट में,
आओ हम सब मिल कर नाचें और गाएँ,
ढोल बजाएँ, डालें गिद्दा और भंगड़ा।
आओ मिलकर फसलों की पैदावार पर,
दें धन्यवाद अपने इष्ट और सृस्टि को,
करें कामना अच्छी अगली फसल की,
शीत ऋतु को भेज, आगमन करें बसंत का।
करें परिक्र्मा लोहड़ी की अग्नि की,
अग्नि की गर्मी से, लाएँ गर्माहट रिश्तों में,
आओ सब मिल कर खाएं पॉपकॉर्न,
लें मज़ा टिल के भुग्गे और रेवड़ी का।
आओ मनाएँ लोहड़ी, शीत की सर्द रात में,
मिलकर बैठें और सेंकें आग लोहड़ी की,
रिश्तों में भी लाएं गर्माहट, और दें,
शुभकामनाएँ, लोहड़ी की।
..... विभा शर्मा
जनवरी २०२५
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