सामाजिक मीडिआ

सामाजिक मीडिआ


आज के युग में, सब सवार हैं, नाव में!
कहते हैं, सोशल मीडिया पर हैं।
यह मेरा पता है - www.https//.......

हाँ, मैं भी हूँ सोशल मीडिया पर।
whatsapp, facebook, twitter और insta पर
मेरे भी अनगिनित दोस्त हैं, सोशल मीडिया पर।

मेरे पते पर आना कभी,
मेरा भी एक वजूद है, मेरा भी मुकाम है,
में भी राजा/रानी हूँ, इस सोशल मीडिया पर।

क्या सही में सोशल है यह मीडिया?
क्या सामाजिक है? यह सामाजिक मीडिया,
क्या सुनता-सुनाता है मीडिया?

एक अनजानी सी दुनिया में,
अनजानी सी नाव के अनजाने से माहौल में,
अनजानी सी सवारिओं के साथ।

मुझे लगता है, आपको भी लगता होगा,
कहा-सुनी का हो गया है, यह सामाजिक मीडिया,
मैं और मेरे अहम का हो गया है, सामाजिक मीडिया।

अट्टहास नहीं, उपहास का हो गया है, यह सामाजिक मीडिया,
हंसी-मज़ाक का नहीं, कटाक्ष का हो गया है यह सामाजिक मीडिया,
सही-गलत की परिभाषा से दूर हो गया है, यह सामाजिक मीडिया।

कभी तो लगता है,
समाज से भी दूर हो गया है
यह सामाजिक मीडिया।

मेरा प्रश्न है,
क्या असामाजिक हो गया है?
यह सामाजिक मीडिया।

सोचिए ज़रा -
क्या इस सामाजिक मीडिया के चक्कर में,मीडिया असामाजिक हुआ है, यां हम।


विभा शर्मा - अगस्त १९, २०२१

2 thoughts on “सामाजिक मीडिआ”

  1. Powerful lines… People are less active in society than on social media that is too away from real world.

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