आओ आज नमन करें,
अपने पहले गुरु, अपनी माँ को,
जिसने जनम दिया, बोलना सिखाया।
फिर आता है, पिता द्वारा सिखाया,
वो पहला कदम,
साइकिल पर वो पहला चक्कर।
कैसे भूलें बालपन के शिक्षक को,
जिसने अक्षर लिखना सिखाया,
चित्रों को बनाना सिखाया।
शिक्षक,
जिसने हमें ज्ञान की गंगा से मिलवाया,
जिसने हमें अपने-आप से मिलवाया,
जिसने हमें हमारे पथ से परिचय करवाया।
आओ आज नमन करें, उस शिक्षक को,
जिसने आदि को अनंत से मिलवा,
ज्ञान की ज्योति को जला,
एक मनुष्य को मानव बनाया।
आओ आज नमन करें, हर उस शिक्षक को,
जिसने पग-पग पर राह दिखाई,
और मुझ को मुझ से मिलवाया।
…. विभा शर्मा