कल तक हम देखते थे,
वह टैक्सी वाला पी कर चला रहा है,
अरे-अरे इस बस का ड्राइवर बोतल खरीद रहा है,
अब पी के बस न चला दे!
अब यह भी देखना पड़ेगा, सोचना पड़ेगा,
कि हवाई जहाज़ का पायलट भी,
पी यां चढ़ा कर तो नहीं बैठा जहाज़ पर,
वह भी अब ड्राइवर ही बन गया।
टैक्सी, कार और बस को तो सवारी,
सड़क पर, रास्ते में रोक सकते हैं,
सवारी उतर सकती है,
दूसरी बस/कार पकड़ सकते हैं।
पर जहाज़ पर क्या करें, अगर पायलट ने ही चढ़ा रखी है?
बस चंद क्षणों की ही तो कहानी है,
उतर भी तो नहीं सकते! कैसे और कहाँ उतरें?
ट्रैफिक भी कम है दूसरा जहाज़ देर से आएगा।
आज नीले-नीले अम्बर में,
बहुत ज़रूरत है, जहाज़-पड़ाव की,
किसी ने बनाने का कभी सोचा ही नहीं!
चलो, अब तो अपनी सुरक्षा के लिए सोचो।
सड़क पर चलते थे, सड़क पर रहते थे,
सोचते थे सड़क पर ही बहुत खतरे हैं,
क्या पता था कि अब आसमान भी सुरक्षित नहीं रहा!
ड्राइवर भी पीता है और पायलट भी चढ़ाता है।
अब जाएँ तो जाएँ कहाँ?
सड़क पर खतरा, आसमान में खतरा!
फिर क्या करें?
ऑनलाइन ही विचरण करें?
विभा शर्मा, अगस्त १२, २०२६