—– अनुभव तुकनायत, विभा शर्मा और अश्वनी तुकनायत
स्वतंत्रता की भोर
सुबह की किरण में तिरंगा लहराए,
निर्भीक, पवित्र, उजियारा छाए।
आवाज़ें मिलकर गीत सुनाएँ,
उस धरती के जहाँ दिल समाएँ।
संघर्षों से हमने राह बनाई,
एकता में शक्ति अपनाई।
सपनों की डोर, उम्मीद की धार,
भारत का जज़्बा रहे अपार।


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